गौतम नगरी चौफेर संजीव भांबोरे भंडारा – 60% ओबीसी समाज की जात निहाय जनगणना की मांग रास्त होने के बावजूद, ओबीसी संघटना तथा विपक्ष का मुंह बंद करने के लिए कुछ समय पूर्व ओबीसी की जातनिहाय जनगणना करने के संदर्भ में कैबिनेट का निर्णय हुआ — यह बात देशवासियों को बतायी गयी।
मगर प्रत्यक्ष जनगणना शुरू होने पर ओबीसी का कॉलम ही जनगणना से गायब होना, यह अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय है।
यदि देश की 60% आबादी को ही जनगणना में स्थान नहीं मिलेगा, तो सामाजिक न्याय, आरक्षण, योजनाएं और अधिकार किस आधार पर तय किये जायेंगे?
इसी कारण अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन महासंघ तथा देश के सभी ओबीसी संघटनाओं की ओर से वर्तमान जनगणना प्रक्रिया का विरोध किया जाता है। जब तक ओबीसी समाज की जात निहाय जनगणना स्पष्ट रूप से शामिल नहीं की जाती, तब तक इस जनगणना को अधूरा और अन्यायपूर्ण माना जायेगा।
डॉ. खुशाल बोपचे ने कहा कि ओबीसी समाज के संवैधानिक अधिकारों की रक्षा हेतु देशव्यापी जन आंदोलन खड़ा करना समय की आवश्यकता है। उन्होंने मांग की कि सरकार तत्काल ओबीसी जात निहाय जनगणना को स्पष्ट रूप से शामिल करे।
⚠️ “ओबीसी की जात निहाय जनगणना हमारा संवैधानिक अधिकार है।”
✍️ डॉ. खुशाल बोपचे
अध्यक्ष — अखिल भारतीय ओबीसी बहुजन महासंघ
एव पूर्व सांसद / विधायक
भंडारा लोकसभा, महाराष्ट्र.



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